‘अप्रैल २०२२ में घर में हाट (बाजार) से कुछ शकरकंद लाए थे । उनमें से एक में शकरकंद में छोटा-सा अंकुर आया था । इस अंकुर को काटकर मैंने मिट्टी में गाढ दिया था । तदुपरांत, उससे बेल तैयार हो गई । फिर केवल ३ माह पश्चात अर्थात जुलै २०२२ में छायाचित्र में दिखाए अनुसार शकरकंद मिले । इनका कुल वजन २ किलो २५० ग्राम था । शकरकंद की बेल काटकर और भी रोपण कर सकते थे । इसके लिए मुझे कोई भी विशेष कष्ट नहीं करने पडते । ‘हम छोटी-सी भी कृति करते हैं, तो भगवान कितना देता है’, इसकी ही यह अनुभूति है । अत: प्रत्येक को ही अपने घर में ही प्राकृतिक पद्धति से रोपण करने पर घर के घर ही में रोपण करने से घर में ही विषमुक्त अन्न की निर्मिति कर सकते हैं ।’