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रामनाथी (गोवा) : दीपावली के मंगलदिनपर अर्थात २७ अक्टूबर को यहां के सनातन आश्रम मेंसद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने श्री लक्ष्मी-कुबेर पूजन किया । श्री. अमर जोशी ने इस पूजन का पौराहित्य किया । पूजन के समय ‘श्री महालक्ष्मीदेवी की कृपा हो, अलक्ष्मी (निर्धनता) दूर हो तथा धर्मकार्य हेतु समृद्धता प्राप्त हो’, ये संकल्प लिए गए ।
क्षणिकाएं
१. इस अवसरपर पर परात्पर गुरु डॉ. आठवलेजी द्वारा धारण की गईं श्रीवत्स पादुकाओं का भी पूजन किया गया ।
२. पूजन के समय साधकों को सूक्ष्म से श्री महालक्ष्मीदेवी का अस्तित्व प्रतीत होकर उनकी कृपावर्षा की अनुभूति हुई ।
३. साधकों को ऐसा प्रतीत हुआ कि पूजन के समय सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ‘हिरण्यवर्णा’ (स्वर्ण की कांति के समान) रूप की भांति प्रतीत हो रही हैं ।
४. पूजास्थलपर श्री महालक्ष्मीदेवी के प्रति भाव जागृत करनेवाले भक्तिगीत चलाए जा रहे थे ।
५. पूजन के समय आश्रम के फर्शपर दैवीय कण दिखाई दिए ।
साधकों ने अनुभव किया अलौकिक चैतन्यसमारोह !
उपनिषदों में ‘शिवं भूत्वा शिवं यजेत् ।’, ऐसा कहा गया है । इसका अर्थ शिवजी अर्थात ईश्वर के साथ एकरूप होकर ही शिवजी (ईश्वर) की पूजा-अर्चना करें । महर्षिजी ने जीवनाडीपट्टिका के द्वारा‘सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी को महालक्ष्मीस्वरूप कहकर गौरवान्वित किया है । ‘जिनमें महालक्ष्मीदेवी का तत्त्व विद्यमान हैं, वे सद्गुरु (श्रीमती) बिंदा सिंगबाळजी ने श्री लक्ष्मी-कुबेर पूजन किया । साधकों को ऐसा प्रतीत हुआ कि परात्पर गुरुदेवजी की कृपा से देवी स्वयं का ही पूजन कर रही हैं, इस अलौकिक चैतन्य समारोह का अनुभव हुआ ।