भारतीय आहार जनुकीय विकारों को ठीक कर सकता है ! – शोधकार्य का निष्कर्ष

लाखों वर्ष पूर्व ही हमारे ऋषि-मुनियों ने मनुष्य शरीर के पोषण हेतु आवश्यक आहार को ढूंढ लिया है । आज विज्ञान उसी के लाभ बता रहा है ! जबतक विज्ञान नहीं बताता, तबतक पाश्‍चात्त्यों का अंधानुकरण करनेवाले भारतीयों को अपनी संस्कृति का महत्त्व ध्यान में नहीं आता, यह भी उतना ही सत्य है !

नई देहली : जर्मनी के ल्यूबेक विश्‍वविद्यालय द्वारा किए गए शोध में भारतीय आहार जनुकीय विकारों को ठीक कर सकता है । विकारों का कारण केवल डी.एन्.ए. में उत्पन्न समस्याएं ही नहीं होतीं, अपितु आहार भी उसमें महत्त्वपूर्ण होता है । आहार विकार उत्पन्न भी कर सकता है और उन्हें ठीक भी कर देता है, यह बात इस शोध से सामने आई है ।

१. विश्‍वविद्यालय के प्रा. रॉल्फ लुडविज के नेतृत्व में रुस के डॉ. अर्तेम वारोवएव, इस्राईल की डॉ. तान्या शेजिन और भारत के डॉ. यास्का गुप्ता इन ३ वैज्ञानिकों ने यह शोध किया । नियतकालिक ‘नेचर’ में उनका यह लेख प्रकाशित हुआ है ।

२. चूहोंपर २ वर्षोंतक शोध करनेपर यह ध्यान में आया कि पाश्‍चात्त्य देशों का उच्च कैलरीवाला आहार जनुकीय विकारों को बढाता है, तो भारतीय उपमहाद्वीप का अल्प कैलरीवाला आहार जनुकीय विकारों को रोकता है ।

३. इस प्रयोग में चूहों के २ समूह बनाए गए थे । एक समूह को पाश्‍चात्त्य पद्धति का आहार दिया गया, तो दूसरे समूह को भारतीय आहार दिया गया । जिस समूह को पाश्‍चात्त्य का आहार दिया गया था, उन चूहों में ‘ल्यूपस’ नामक विकार उत्पन्न होकर उनकी स्थिति गंभीर बन गई, तो दूसरा समूह इस विकार से बच गया ।

 

‘फास्टफूड’ जनुकीय विकारों को बढाते हैं !

डॉ. यास्का गुप्ता ने बताया कि पाश्‍चात्त्य देशों में प्रचलित पिज्जा, बर्गर आदि फास्टफूड जनुकीय विकारों को बढाने में सहायक होते हैं, तो उसी समय भारतीय शाकाहारी आहार में अंतर्भूत कांजी, सोयाबीन का तेल, दाल-चावल, सब्जी एवं हल्दी का उपयोग शरीर को जनुकीय विकारों से बचाता है ।

स्रोत : दैनिक सनातन प्रभात

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