रामनाथी, गोवा के सनातन आश्रम श्री काळभैरव दंड पूजन तथा स्थापना विधि संपन्न !
भारत की क्षेत्रपालदेवता ‘कालभैरव’ श्री क्षेत्र काशी में ‘स्वर्णकालभैरव’ के रूप में विराजमान हैं । पृथ्वीपर कुल ५१ शक्तिपीठ हैं ।
भारत की क्षेत्रपालदेवता ‘कालभैरव’ श्री क्षेत्र काशी में ‘स्वर्णकालभैरव’ के रूप में विराजमान हैं । पृथ्वीपर कुल ५१ शक्तिपीठ हैं ।
डॉ. नरेंद्र दाभोलकर, र्का. पानसरे, प्रा. कलबुर्गी तथा पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या में सहभागी सनातन कार्यकर्ताआें को पुलिस विभाग ने पकडा है ।
परात्पर गुुरु डॉ. आठवलेजी को स्वास्थ्यमय दीर्घायु प्राप्त हो, हिन्दू राष्ट्र स्थापना के कार्य के लिए सभी देवताआें के आशीर्वाद प्राप्त हों, इस संकल्प को लेकर महर्षिजी ने पू. डॉ. उलगनाथन्जी के माध्यम से बताने के अनुसार विजयादशमी के शुभमुहूरतपर १८ अक्टूबर को भगवान जगन्नाथजी की काष्ठ की मूर्ति की प्राणप्रतिष्ठा का समारोहन संपन्न हुआ ।
परात्पर गुुरु डॉ. आठवलेजी को दीर्घायु प्राप्त हो, हिन्दू राष्ट्र स्थापना के व्यापक कार्य में अनिष्ट शक्तियों द्वारा उत्पन्न बाधाएं दूर हों तथा आध्यात्मिक कष्टों से साधकों की रक्षा हो; इसके लिए रामनाथी (गोवा) के सनातन आश्रम में १४ अक्टूबर को तीसरा पंचमुखी हनुमानकवच यज्ञ संपन्न हुआ ।
भगवान को प्रिय दास्यभक्ति का सर्वोच्च आदर्श एवं रामराज्य की स्थापना में बडा सहभाग रहनेवाले हनुमानजी व्यष्टि एवं समष्टि साधना का अपूर्व संगम ही है !
हाल-ही में पश्चिम महाराष्ट्र देवस्थान समिति द्वारा मंदिरप्रवेश के समय अपर्याप्त कपडे परिधान न करने के विषय में लिए गए निर्णय के अनुषंंग से यह चर्चासत्र आयोजित किया गया था ।
अडचनें दूर होने तथा साधकों की रक्षा होने हेतु यहां के सनातन आश्रम में ६ अक्तूबर को ’पंचमुखी हनुमानकवच’ यज्ञ संपन्न हुआ ।
पुरो (अधो) गामी लोग एवं प्रसारमाध्यमों द्वारा ’सनातन पर प्रतिबंध लगाएं ’ इस प्रकार निराधार अफवाहें फैलाई जा रही हैंं । ’इंडिया टुडे’ के श्री. उदय माहुरकर ने इन सब पर कडा जबाब देनेवाला लेख लिखा है, जिसके चुनिंदे सूत्र वाचकों के लिए साभार प्रकाशित कर रहे हैं ।
सनातन का कार्य अच्छा है । आप को कभी भी सहायता की आवश्यकता पडी, तो मैं सहायता के लिए सदैव सिद्ध हूं । भाजपा के श्री. प्रशांत सातव ने ऐसा प्रतिपादित किया ।
नालासोपारा विस्फोटक प्रकरण में बंदी बनाए गए निर्दोेष हिन्दुत्वनिष्ठों के समर्थन में एवं सनातन संस्था पर प्रतिबंध की, की जा रही मांग के विरोध में ३० सितंबर को राष्ट्रीय हिन्दू आंदोलन किया गया।