भारतीय संस्कृति के संवर्धन हेतु संग्रहालयों का विकास आवश्यक ! – श्री. चेतन राजहंस, प्रवक्ता, सनातन संस्था
‘प्रकृति में विद्यमान मूलस्थान के दोषों को दूर करना संस्कृति को विकसित करना है । भारतीय संस्कृति मनुष्य जीवन एवं प्रकृति के दोषों को दूर कर विकसित हुई है ।