समाज में विद्यमान दुष्प्रवृत्तियों का वैधानिक पद्धति से निर्दालन करें ! – श्रीमती दीक्षा पेंडभाजे, सनातन संस्था
आनंदी जीवन के लिए साधना की प्रमुख नींव स्वभावदोष तथा अहंनिर्मूलन प्रक्रिया कैसे और क्यों अपनानी चाहिए ?, इस विषय में मार्गदर्शन किया ।
आनंदी जीवन के लिए साधना की प्रमुख नींव स्वभावदोष तथा अहंनिर्मूलन प्रक्रिया कैसे और क्यों अपनानी चाहिए ?, इस विषय में मार्गदर्शन किया ।
राजराजेश्वरी नगर में ३० सितंबर को ‘प्रथम कन्नड साहित्य सम्मेलन’ आयोजित किया गया था । इस सम्मेलन में सनातन संस्था की ओर से ग्रंथप्रदर्शनी लगाई गई ।
सनातन संस्था ‘आदर्श गणेशोत्सव कैसे मनाएं ?’, साथ ही शास्त्र के अनुसार श्री गणेशपूजन तथा विसर्जन कैसे करना चाहिए ?, इस विषय में उद्बोधन करती है । श्री गणेशजी की मूर्ति प्लास्टर ऑफ पैरिस की न होकर शाडू मिट्टी की होनी चाहिए, यह हमारा मत है ।
आजकल उत्सवों में काल के अनुसार परिवर्तन किए जा रहे हैं, जिससे कि उत्सवों की पवित्रता ही नष्ट हो रही है ।
गणेशोत्सव के समय में सनातन संस्था तथा हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से अनेक स्थानोंपर हस्तपत्रिकाएं, भितीपत्र, फ्लेक्स-ग्रंथ प्रदर्शनी, प्रवचन जैसे विविध माध्यमों से अध्यात्मप्रसार किया गया ।
घनश्याम अगरवाल मित्रमंडल के कार्यकर्ता तथा सनातन संस्था के साधकों ने तापी नदी में पूजा सामग्री की स्वच्छता कर फेंकी गई गणेशमूर्तियों को उठाकर पानी के दह में उनका विधिवत पूजन कर उनका पुनः विसर्जन किया ।
आदर्श गणेशोत्सव अभियान के अंतर्गत सनातन संस्था तथा हिन्दू जनजागृति समिति की ओर से विविध स्थानोंपर प्रशासनिक अधिकारी तथा जनप्रतिनिधियों को निवेदन सौंपे गए, अनेक स्थानोंपर प्रवचन लिए गए, साथ ही कुछ गणेशोत्सव मंडलों के मंडपों में धर्मशिक्षा के विषय में फलकों की प्रदर्शनीयां लगाई गईं ।
नेरे (तहसील भोर) के बालसिद्धेश्वर गणेशोत्सव मंडल में सनातन संस्था की ओर से लिए गए ‘ज्येष्ठ गौरी तथा श्री गणेशपूजन का अध्यात्मशास्त्र’ प्रवचन में ५०० से भी अधिक, अर्थात पूरा गांव ही उमडा था ।
धर्महानि रोकना कालानुसार आवश्यक धर्मपालन है और वह उस देवता की समष्टि स्तर की साधना ही है । बिना इस उपासना के देवता की उपासना पूर्ण नहीं हो सकती है ।
गोवा दूरदर्शन पर्यावरण, स्वास्थ्य, महिलाआेंकी सुरक्षा, शिक्षा, उत्सव आदि अनेक विषयों पर समाज से सीधे संवाद करने के लिए लाइव फोन इन कार्यक्रम का आयोजन करता है ।